पुस्तकों का विवरण ( click here )







पुस्तक "रामकथा रहस्य" का मुख्य प्रष्ठ |


पुस्तक "अधूरा सृजन " का मुख्य प्रष्ठ |


पुस्तक "पंचसुधा दुम दोहावली " का मुख्य प्रष्ठ |


पुस्तक "काव्य कुसुम " का मुख्य प्रष्ठ |


पुस्तक "लंका में श्री हनुमान वार्ता " का मुख्य प्रष्ठ |


पुस्तक "सम्पूर्ण रामायण " का मुख्य प्रष्ठ |





पुस्तक "षटरिपु निबंधमाला" का मुख्य प्रष्ठ | 


पुस्तक "बहुअंचलीय राम कथा" का मुख्य प्रष्ठ | 


सर मदनलाल ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूट के फार्मेसी विभाग के प्रवक्ता डॉ. डी. के. पटेल जी को 
श्री सुदामा लाल पाल  की कृति " सम्पूर्ण रामायण " सप्रेम भेंट |


प्रसिद्ध कहानीकार श्री  शिवअवतार पाल  को पुस्तक " पंचसुधा दुम दोहावली भेंट करते हुए श्री सुदामा लाल पाल |


ख्याति प्राप्त कवि एवं साहित्यकार श्री रवि पाल "खामोश " को पुस्तक पंचसुधा दुम दोहावली भेंट करते हुए श्री सुदामा लाल पाल |



 श्री नाथूराम धनगर (अध्यक्ष , राजमाता अहिल्याबाई होल्कर समाजसेवा संस्थान, इटावा ) को पुस्तक "षटरिपु निबंधमाला " सप्रेम भेंट |

श्री अरविन्द धनगर  (महामंत्री , राजमाता अहिल्याबाई होल्कर समाज सेवा संस्थान , इटावा , उ.प्र.) को लेखक श्री सुदामा लाल पाल की पुस्तक " षटरिपु निबंधमाला " भेंट करते हुए श्री सुदामा लाल पाल के पुत्र श्री प्रद्युम्न कुमार पाल | 



महाकुम्भ के अवसर पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी को लेखक श्री सुदामा लाल पाल "बहुअंचलीय रामकथा " भेंट करते हुए आलोक चतुर्वेदी (प्रकाशक , साहित्य संगम , प्रयागराज ) | 

श्री राम जन्मभूमि आन्दोलन के पुरोधा स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी को 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास एवं भूमिपूजन के ऐतिहासिक अवसर पर प्रयागराज अलोपीबाग स्थित उनके आश्रम में साहित्य संगम प्रकाशन के संपादक श्री आलोक चतुर्वेदी ने श्री सुदामा लाल पाल द्वारा रचित उनकी पुस्तक  "बहु आंचलीय रामकथा "की प्रति भेंट कर सम्मानित किया | स्वामी वासुदेवानंद जी ने बहु आंचलीय रामकथा का अवलोकन करते हुए इस कृति और प्रकाशन की भूरी भूरी प्रशंसा की |
सुप्रसिद्ध हास्य कवि श्री अजय अंजाम जी के बड़े भ्राता श्री गोविन्द माधव शुक्ल जी को लेखक सुदामा लाल पाल की पुस्तक " योगासन एवं प्राणायाम" सादर भेंट करते हुए लेखक के पौत्र देवेश सिंह पाल।
श्री नाथूराम धनगर, (अध्यक्ष, अहिल्या बाई होलकर समाज सेवा संस्थान, उ. प्र.) को लेखक सुदामा लाल पाल की तत्कालीन पुस्तक "योगासन एवं प्राणायाम" की प्रति भेंट करते हुए लेखक के पौत्र देवेश सिंह पाल।
श्री पूरन सिंह पाल (प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज, इटावा, उ. प्र.) को श्री सुदामा लाल पाल की नवीन पुस्तक "योगासन एवं प्राणायाम" की प्रति भेंट करते हुए लेखक के पौत्र देवेश सिंह पाल।
श्री अरविंद प्रताप सिंह धनगर (महामंत्री, अहिल्याबाई होलकर समाज सेवा संस्थान, उ. प्र.) को श्री सुदामा लाल पाल की तत्कालीन पुस्तक 'योगासन एवं प्राणायाम' भेंट करते हुए लेखक के पौत्र देवेश सिंह पाल।
ऑल इंडिया धनगर समाज महासंघ के अध्यक्ष श्री नरेन्द्र धनगर जी को नवीन पुस्तक "योगासन एवं प्राणायाम" की प्रति सप्रेम भेंट करते हुए लेखक श्री सुदामा लाल पाल के पौत्र देवेश सिंह पाल।
आदरणीय कक्का श्री, एडवोकेट पं. योगेन्द्र किशोर तिवारी जी को अपनी पुस्तक "योगासन एवं प्राणायाम" की प्रति भेंट करते हुए लेखक श्री सुदामा लाल पाल।

डॉ. कुश चतुर्वेदी ( प्रवक्ता, हिंदी विभाग, इस्लामिया इंटर कॉलेज, इटावा) को लेखक श्री सुदामा लाल पाल की नवीन पुस्तक " योगासन एवं प्राणायाम"  की प्रति भेंट करते हुए लेखक के पौत्र देवेश सिंह पाल।

दीपावली के सुअवसर पर आदरणीय, डॉ. आर. एस. पाल ( जी. एल. पी. हॉस्पिटल प्रा. लि., महेराचुंगी, इटावा ) को लेखक श्री सुदामा लाल पाल की पुस्तक "योगासन और प्राणायाम" की प्रति भेंट करते हुए लेखक के पौत्र देवेश सिंह पाल।  

होम्योपैथिक चिकित्सक,योगाचार्य एवं  माननीय डा0 के.के.सक्सेना को लेखक श्री सुदामा लाल पाल की तत्कालीन पुस्तक "योगासन और प्राणायाम" की प्रति भेंट करते हुए लेखक के पुत्र श्री प्रद्युम्न कुमार पाल ।


                                         - शिवअवतार पाल |   

डॉ. मंजू यादव (प्रवक्ता, हिंदी विभाग, जनता इंटर कॉलेज, बकेवर) और उनके पति श्री रामनरेश यादव जी को अपनी प्रकाशित पुस्तकें - बहुआंचलीय रामकथा, पंचसुधा दुम दोहावली और काव्यकुसुम संकलन प्रदत्त करते हुए लेखक श्री सुदामा लाल पाल। (मध्य में)

डी.एफ.ओ  साहब मा0 राजेश जी वर्मा व उनकी थर्मपत्नी एवं उनकी सुपुत्री कु.दीपशिखा एम. टेक. (डायरेक्टर) को अपनी स्वलिखित पुस्तकें सप्रेम भेंट करते हुए श्री सुदामा लाल पाल (बायीं ओर)

मा. डी.एफ.ओ.(Distric Forest Officer)साहब  श्री राजेश सिंह जी वर्मा व उनकी धर्म पत्नी को उनके पुस्तकालय के लिए स्वलिखित पुस्तकें सप्रेम भेंट करते हुए साहित्यकार और लेखक श्री सुदामा लाल पाल। ( बायीं ओर)




रामकथा के अनेक प्रसंग हैं, किंतु उन्होंने जिन प्रसंगों का चयन किया है, वह भगवन राम की मुस्कराहट और  उसका मानवीकरण, उसका रहस्य एवं निहितार्थ प्रकट करता है | मैं कितनी प्रशंसा करूँ श्री पाल साहब के महनीय प्रयास का जिसके कारण उन्होंने भक्ति भावना के तले राम साहित्य का अकथनीय निरूपण किया है  | 
मैं स्वतः बहुत ही प्रसन्न हूं उनके रामकथा साहित्य को पढ़कर , और ईश्वर से यही प्रार्थना है की श्री सुदामा लाल पाल जी को सुख, शांति व पूर्ण दीर्घायु बनाये रखें |

                            - त्रिभुवन नाथ तिवारी 
                                 (जिला सेवायोजन अधिकारी , इटावा)
                          10 जुलाई सम्वत 2060 




यह मेरा परम सौभाग्य है की श्रद्धा से परिपूर्ण राम कथाओं को आजीवन समर्पित व्यक्तित्व "श्री सुदामा लाल पाल " द्वारा रचित  "सम्पूर्ण रामायण " के दर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ | यह मेरे जीवन के स्वर्णिम अवसरों में से एक अनूठा अवसर है | श्री पाल साहब से मेरा परिचय बीस (20) वर्ष पूर्व हुआ , मैं उनके विनम्र व्यवहार से बहुत प्रभावित हूं | श्रद्धा और मनोबल की पराकाष्ठा के प्रतीक श्री सुदामा लाल पाल अभी भी रचना धर्म मर जीवनदान दे रहे हैं जो स्वयं श्रद्धालु ह्रदय का जीवंत प्रमाण  हैं |

- नेमसिंह ' रमन '
अध्यक्ष , उत्तर प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन, इटावा 
152 , रामगंज , इटावा |


श्री सुदामा लाल पाल जी की रचनाओं का मैंने गंभीरता से अध्ययन किया है और उससे मैं इस निष्कर्ष पर पहुंची कि उनके काव्य का बड़ा भाग काव्यत्व की द्रष्टि से सरस , सुंदर एवं चमत्कारपूर्ण बन गया है | कवि ने संकेतात्मक शैली का प्रयोग करके पाठकों को आकर्षित करने का सफल प्रयास किया है | कवि का मूल निवास जिला इटावा में होने के कारण उनकी रचना पर कन्नौजी बोली  का प्रभाव स्पष्ट द्रष्टिगोचर होता है | मैंने पाल साहब की काव्य रचना "पंचसुधा दुम दोहावली" को हिंदी के एम. ए. के छात्रों को कक्षा में पढाया , तो विद्यार्थियों द्वारा इस कृति को बहुत उपयोगी बताया गया है | कक्षा में कई दिनों तक इस रचना संबंधी विषयों पर विद्यार्थियों ने चर्चाएँ की और इस कृति एवं इसकी लेखन शैली को भी खूब सराहा |

            - डॉ. सुनीता तिवारी 
            एसोसिऐट प्रोफ़ेसर , हिंदी विभाग
                   के.के.डी.सी. इटावा |




 परमआदरणीय पाल जी ,
 सादर अभिवादन ,
आपके द्वारा प्रेषित द्वादस ग्रंथों की सूची एवं आपके जीवन से सम्बंधित जानकारियां से युक्त पत्र इंटरनेट के माध्यम से प्राप्त हुआ | मुझे वस्तुतः ह्रदय से अति प्रसन्नता है कि आपके द्वारा रचित द्वादस ग्रंथों के द्वारा न केवल आपका स्वयं का मान व सम्मान बढ़ा है अपितु स्वजाति के सभी लोगों का गौरव बढ़ा है |
आज दिनांक 31/05/2020 को लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का जन्मदिवस है | मैं अपने सभी परिवारीजनो एवं साथियों समेत राजमाता को उनके जन्मदिवस के अवसर पर नमन करता हूं | इसके साथ ही आपका भी शत शत वंदन करता हूं | मैं आपसे यह जरूर ही विनम्र प्रार्थना करना चाहूँगा कि आपके लेखन के माध्यम से महारानी अहिल्याबाई होल्कर से सम्बंधित एक ग्रंथ की रचना हो सके | मुझे आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि आप मेरी इस प्रार्थना को अवश्य ही स्वीकारेंगे |
पुनः एक बार आपका अभिवादन व वंदन |
भवदीय कृपाकांक्षी 
केशराम पाल 
(पूर्व सदस्य , जिला पंचायत इटावा /औरैया )
(पूर्व अध्यक्ष , समाजवादी पार्टी विधानसभा क्षेत्र , औरैया )
(प्रबंधक, श्री हरदयाल महारानी देवी इंटर कॉलेज ,
सर्वोदय नगर, पुर्वा तरा, सहार -औरैया )
(पूर्व प्रधानाचार्य , श्री भगवानदास इंटर कॉलेज ,  हरचंदपुर - औरैया )
      



श्री केशराम पाल (प्रबंधक जी ) द्वारा प्राप्त प्रशंसा पत्र |



  श्री सुदामा लाल पाल की रचनायें –

  • प्रकाशित रचनायें –



             1.       राम कथा रहस्य

             2.       अधूरा सृजन खंड काव्य

             3.       लंका में श्री हनुमान वार्ता

             4.       पंच सुधा दुम दोहावली

             5.       काव्य कुसुम संकलन

             6.       सम्पूर्ण रामायण

             7.       बहुअंचलीय रामकथा

             8.       षटरिपु निबंधमाला

             9.       योगासन एवं प्राणायाम

            10.   संत श्री नरसी मेहता कथा

            11.   कृपा सिन्धु श्री राम

            12.   ब्रज की गोपियाँ और लीला पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण

            13.   विरासत 

            14.   लोकमाता अहिल्याबाई  होल्कर


  • अप्रकाशित रचनायें -

            15.   नूतन भlगवत कथा

            16.   विविध वंशावली

            




Comments